बधाई कि उनका आना कामयाब हुआ

(विवेक कुमार पाठक
स्वतंत्र पत्रकार)
साल भर पहले कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र शर्मा ने आज ही के दिन कांग्रेस जिला सदर की कमान संभाली थीं। तब उनकी चुनौतियों और आगामी संघर्ष पर थोड़ा बहुत लिखा था। बधाई कि उनका आना कामयाब हुआ।
एक साल बाद आज उनकी कांग्रेस पार्टी और नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए ग्वालियर, मध्यप्रदेश से लेकर देश की राजनीति में काफी कुछ बदला है।
डॉ. देवेन्द्र शर्मा के कार्यकाल में कांग्रेस पंद्रह साल के वनवास के बाद सत्ता में पहुंची तो कांग्रेस के राष्ट्रीय सदर राहुल गांधी दो दफा ग्वालियर में आए। एक बार रोड शो और दोनों दफा फूलबाग में आमसभा।
मप्र में कांग्रेस की सरकार जिन विधायकों के भरोसे बनी है उसमें ग्वालियर में 6 सीटों से जीते हुए 5 विधायक भी शामिल हैं।
देवेन्द्र शर्मा के गृहक्षेत्र में कांग्रेस ने भाजपा की मजबूत सीट ग्वालियर दक्षिण से युवा एवं पढ़े लिखे उम्मीदवार प्रवीण पाठक को आगे करके जीत हांसिल की। इस सीट की विजय में उनका स्वयं का योगदान भी अहम रहा होगा क्योंकि यहां ब्राहमणों में उनका प्रभाव एवं मृदुभाषी स्वभाव के कारण सहज स्वीकार्यता रही है।
इस तरह देखा जाए एक साल का कार्यकाल डॉ. देवेन्द्र शर्मा के लिए वाकई उपलब्धि भरा रहा है।
वे पूजा पाठ के धुनी हैं सो इसमें ईश्वर कृपा का अपना योगदान रहा होगा। खैर ईश्वर की लीला ईश्वर जानें।

फिलहाल बीते साल उनकी नियुक्ति के वक्त उनकी आगामी चुनौतियों और संघर्षों पर विचार करती 22 मई 2018 की पुरानी पोस्ट शेयर की है।

“लख-लख बधाइयां “भगवा प्रेमी कांग्रेसी जिलाध्यक्ष साहेब“।

ग्वालियर में भगीरथी इंतजार के बाद आखिर कांग्रेस ने शहर जिला अध्यक्ष तय कर लिया। साधु संतों और बाबा वैरागियों के भक्त डॉ. देवेन्द्र शर्मा को बहुत बहुत बधाई।

रामबाग कॉलोनी शिन्दे की छावनी वाले डॉ देवेन्द्र शर्मा सरल सौम्य मृदुभाषी हैं और यही उनकी यूएसपी है।

कांग्रेस के लिए 2018 चुनाव करो या मरो वाला चुनाव है।

15 साल के वनवास का सामना करते हुए कांग्रेस अवसादग्रस्त पार्टी के रुप में संघर्ष कर रही है। उसके सैकड़ों कार्यकर्ता 15 साल में थक चुके हैं।

“कई नेता 2003 के बाद से वरिष्ठ या बुजुर्ग हो गए हैं।“

देवेन्द्र शर्मा जैसे नेता उन्हीं वरिष्ठों में शामिल हैं जो अब तक कांग्रेस के पंजे के लिए किला लड़ा रहे हैं। सत्ता से दूरियों का सामना करते हुए दूरियों के बाबजूद आज भी कांग्रेस के साथ खड़े अमर सिंह माहौर, राजकुमार शर्मा बाल खांडे सहित तमाम वरिष्ठ नेता सम्मान के हकदार हैं।

विपक्षी दल को सत्ता वाले किस किस तरह से खत्म करने उनके नेताओं को तोड़ते हैं ये सब जानते हैं।

इन तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए डॉ. देवेन्द्र शर्मा जैसे नेता आज की कांग्रेस के लिए जरुरी हैं। 15 साल से बीजेपी की सत्ता देख रही नवमतदाताओं की पूरी पीड़ी ने कांग्रेस को दमदार स्थिति में नहीं देखा है।

ऐसे मेंं सत्ता से नाखुश शहर के युवाओं को कांग्रेस से जोड़ना नए अध्यक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी। चूंकि एंटी इनकम्बेंसी के तेवर पूरे मप्र में हैं ऐसे में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष को काम करने पूरा मौका है।

अपने पट्ट समर्थक की जगह उदार डॉ. देवेन्द्र शर्मा का जिलाध्यक्ष बनाया जाना ज्योतिरादित्य सिंधिया की आगामी रणनीति को सामने लाता है।

डॉ. देवेन्द्र शर्मा को पूरा शहर जानता है कि ये साधु संत मंदिर और महात्माओं के मुरीद हैं। ग्वालियर में कई पीठों के शंकराचार्य उनके निज निवास पर हजारों शहरवासियों से मिलते हैं ।

अपने निवास पर भगवा साधु संतों के आगमन से उनकी हिन्दुत्व प्रेमी कांग्रेसी की रही है।

वे माधवराव सिंधिया के साथ वाले कार्यकर्ता हैं सो ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए विश्वसनीय और आदर योग्य हैं।

अब पिता के साथ वाले इस पुराने कांग्रेसी की कदमताल उनके सांसद बेटे से कैसी रहती है ये वक्त बताएगा।

फिलहाल तो नियुक्ति होते ही छत्री परिसर में माधवराव सिंधिया को प्रथम प्रणाम कर डॉ. देवेन्द्र शर्मा ने ज्योतिरादित्य की नजर में सही शुरुआत कर दी है।

उन्हें कांग्रेस के आगामी संघर्ष के लिए बधाई।

कांग्रेस पक्ष में रहे या विपक्ष में उनकी मेहनत और राजनैतिक प्रवीणता हम दिसंबर की सर्दियों में चुनाव परिणाम आते ही खूब देख लेंगे।

अभी शुरुआत है तो लख लख बधाइयां भगवा प्रेमी कांग्रेसी जिलाध्यक्ष साहेब।

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