कलेक्टर गाईड लाईन को सुसंगत बनाने के लिए एक समिति का गठन किया जाए: चेम्बर

कलेक्टर गाइड लाइन पर चेम्बर भवन में बैठक सम्पन्न, बैठक में आए सुझावों को जिलाधीश, ग्वालियर एवं मुख्यमंत्री जी के सम्मुख प्रस्तुत किए जाने का लिया गया निर्णय
ग्वालियर, 8 जून । वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 1 जुलाई से लागू होने वाली कलेक्टर गाईड लाईन पर चर्चा करने हेतु आज एक बैठक का आयोजन चेम्बर भवन में किया गया । बैठक में उपस्थित सभी महानुभावों द्वारा
बैठक की अध्यक्षता-अध्यक्ष, विजय गोयल द्वारा की गई । इस अवसर पर आपने कहाकि सम्पत्तियों की खरीदी एवं विक्री पर लगने वाले शुल्क के लिए प्रत्येक वर्ष इसकी समीक्षा की जाती है और दरों में संशोधन किए जाते हैं, परन्तु ग्वालियर में दरें शासन द्वारा काफी अधिक बढ़ा दी गई हैं, जिसके कारण आमखरीददारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है ।
बैठक का संचालन कर रहे, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि कलेक्टर गाइड लाईन को लेकर हम लगातार डिस्ट्रिक  रजिस्टार से बात कर रहे थे, परन्तु उनके द्वारा आपत्तियों को सुने बगैर ही गाइडलाईन को अंतिम रूप दे दिया गया है, इसका हम पुरजोर विरोध कर रहे हैं और अपनी आपत्ति से जिलाधीश, ग्वालियर एवं शासन को शीघ्र ही अवगत कराने वाले हैं ।
बैठक में उपस्थितजनों द्वारा इस बात पर आपत्ति व्यक्त की गई कि कृषि भूमि जिसकी रजिस्ट्री करवाने पर प्रत्येक नाम से 10 हजार फीट का स्लेब लगाया जाता है, जिससे भूमि पर लगने वाली स्टॉम्प डयूटी बहुत अधिक हो जाती है । इसलिए इसके स्लेब वही लगाया जाना चाहिए । वर्ष 2011 में जब जवाहरलाल नेहरू शहरी सौंदर्यीकरण योजना के अन्तर्गत स्टॉम्प ड्यूटी अधिकतम 5% होना चाहिए थी । इस आधार पर ग्वालियर शहर की स्टॉम्प ड्यूटी 5% की गई, लेकिन कलेक्टर गाइड लाइन तीन गुना तक बढ़ा दी गई, जिसके परिणाम स्वरूप रियल स्टेट का व्यापार ठप्प हो गया । कई एरिया ऐसे हैं, जहाँ आप रजिस्ट्री होना ही बंद हो गईं । महलगाँव मोजा के अन्तर्गत लक्ष्मीबाई कॉलोनी, विक्की फैक्ट्री, श्रीराम कॉलोनी, गोले का मंदिर क्षेत्र आते हैं, जबकि इनके वास्तविक भूमि मूल्य में बहुत अंतर हैं, लेकिन कलेक्टर गाइड लाइन एक ही दर से ली जाती है । कृषि भूमि जिनकी कीमतें बहुत अधिक हैं, जिससे किसान आवश्यकता पर भूमि बेंच नहीं पा रहा है, क्योंकि कलेक्टर गाइड लाइन ज्यादा है, वहीं शासन भी अगर भूमि अधिग्रहण करता है, तो उसे अधिक मूल्य देना होता है । इसी प्रकार रजिस्ट्री के पंजीकरण शुल्क .8% है, जबकि समीपवर्ती प्रदेशों में अधिकतम 30 हजार है, हमारे यहाँ कलेक्टर गाइड लाइन का .8% लिया जाता है, वह बहुत अधिक है ।
व्यवसाईयों ने कहा कि नीलामी में बिकने वाली सम्पत्ति का मूल्यांकन सेल सर्टिफिकेट के आधार पर ही होना चाहिए, जबकि अभी वह कलेक्टर गाइड लाइन पर ही उसका पंजीकरण किया जाता है, उसे सेल सर्टिफिकेट के आधार पर ही किया जाना चाहिए । बैठक में यह भी सुझाव आया कि समग्र कलेक्टर गाइड लाइन को सुसंगत बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जानी चाहिए, जिससे ग्वालियर शहर की कलेक्टर गाइड लाइन सुसंगत हो सके । कॉमर्शियल बहुमंजिला कॉम्पलेक्स में भूतल पर 0%, प्रथम तल 25%, द्वितीय तल 40%, तृतीय तल 50% की छूट है, लेकिन यह छूट घरेलू दर से लगने वाली स्टॉम्प ड्यूटी से कम नहीं होगी । यह प्रावधान बदला जाना चाहिए क्योंकि घरेलू और कॉमर्शियल दरों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है । बैठक में संयुक्त अध्यक्ष-प्रशांत गंगवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष-वसंत अग्रवाल सहित कार्यकारिणी सदस्य, संजय कपूर, गौरव जैन, दीपक जैस्वानी, सतीश गोयल तथा बिल्डर्स सुदर्शन झंवर, हरीप्रसाद अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, राजा श्रीवास्तव सहित काफी संख्या में व्यवसाईगण उपस्थित थे ।
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