बाबूजी……

पिता जो पहले बाबू जी थे ….
आज वो कैसे डैड हुए ?
बाबू जी के आने पर
घर में सब सतर्क हुए
चिंटू भागा पुस्तक लेकर
गुड़िया भी चुपचाप खड़ी
माँ भी रसोई में झटपट पहुँची
अस्त व्यस्त  फैला था जो भी
 उसको सब समेट कर बोली
भोजन की थाली लाती हूं
पंखा लेकर दौड़ पड़ी
बाबू जी की आहट से
रामू भी भागा दौड़ा
मछर दानी टांग के सीधे
बाबूजी से आकर बोला
पूरा घर जो तीतर बितर था
बाबूजी की उपस्थिति से
अनुशासन में सभी हुए
जो बाबूजी कल थे
वो आज क्यो नहीं रहे
सबने मिलकर बाबू जी को
क्यों डैड बनाया
आज बाबू जी कहाँ गए???
अपनी ही संतति ने
बाबू जी का विश्वास हिलाया
उनके अनुशासन को भी दकियानूसी खयाल बताया
उनकी समझाइश को भी
कभी ना मन से स्वीकारा
पल पल पर उनको अकेले पन का अहसास कराया
उनकी अमूल्य सम्पति को  भी आउट ऑफ फैशन  ही बताया
जब से बाबू जी  डैड हुए
 तब से बाबूजी खामोश हुए
अपने अरमानो को घोटकर
अब वो जीना सीख गए
सब कुछ गलत देखकर भी टोकना तो भूल  गये
अपनी समझिश को भी
अब वो कहते हैं……
बेटा मैं तो सटिया गया हूँ….
अपनी बीमारी में हैं कहते
बेटा मैं तो स्वस्थ भला हूँ
आँखे  अब भी परफेक्ट हैं
बेटे के दुख को बाबूजी
आज भी सह नही पाते हैं
बस यही तसल्ली देते हैं
कोई नही कल पेंशन मिल जाएगी  .  ….
जो बाबूजी कल थे वो आज क्यो नहीं रहे …
सबने मिलकर क्यों बाबू जी को डैड बनाया
क्यों बाबूजी को डैड बनाया
(वैशाली श्रीवास्तव)
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